लघुकथा कहानियाँ पढ़े और PDF में डाउनलोड करे

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Short Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cult...Read More


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  • करवाचौथ की शॉपिंग

    सिया बालकनी में खड़ी होकर अपने पति को ऑफिस जाते हुए देख रही थी। सुबह की हल्की धू...

  • मुकम्मल

    पंद्रह साल पहले बिछड़े राघव और अवनी की कहानी, जिसे वक्त और परिस्थितियां कभी खत्म...

  • ख़ुशी

    सूरतगढ़ कस्बे में एक मध्यवर्गीय परिवार रहता था, जिनका अपना पुस्तेनी पंसारी का का...

तुम हो तो सब कुछ है - भाग 8 By Ankit Khatri

प्यार को नाम मिले अभी कुछ ही दिन हुए थे।आरव और नैना ने अपने रिश्ते को लेकर एक बात साफ तय कर ली थी—वे जल्दबाजी नहीं करेंगे, अपने परिवारों का सम्मान करेंगे और अपने करियर को भी उतनी ह...

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सुख-चैन By Rajeev kumar

मंगरू ने बैठे-बैठे सोचा कि घर के लोगों के सुख-चैन की पूर्ति करना ही नियती है, क्या यही जीवन है। अगर यही जीवन है तो कैसा यह जीवन है। अपनी पसंद का कुछ कर नहीं सकता, कुछ खरीद नहीं सकत...

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काल-दोष By Deepak sharma

                सर्द दिसंबर की उस तेरहवीं तारीख को विलंब के कारण हिमगिरि एक्सप्रेस पठानकोट से लखनऊ रात में नौ पैंतीस पर पहुंची।   &nbsp...

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कर्त्तव्य By Rajeev kumar

  भयंकर गर्मी से निजात पाने के लिए सब अपने-अपने तरह से कोशिश कर रहे थे। सुर्यदेव की उग्रता के सामने सब नतमस्तक थे। आलम यह था कि सुर्यदेव जो सुबह उग्र होते थे तो उनका गुस्सा शाम को...

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स्कूल की छुट्टी और बारिश By Vandna Sharma

अदिति किचन में जल्दी-जल्दी हाथ चला रही थी। दीवार घड़ी में एक बज रहा था। डेढ़ बजे अर्णव की छुट्टी होनी थी।बाहर सुबह से झिम-झिम बारिश हो रही थी, जो रुकने का नाम ही नहीं ले रही थी। का...

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आज्ञा By Rajeev kumar

  प्रताप ने कुछ देर रूक कर कुछ गहरा सोचा और आगे बढ़ गया, धड़कन सामान्य हो चली थी और पसीने की बुंदे उसके रूमाल में समा चुकी थीं लेकिन कुछ सोच तो वह अब भी रहा था। प्रताप के ललाट के ऊपर...

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raja virandr ki love story By Dheeraj kumar Kashyap

राजा वीरेंद्र और रानी देविकाएक समय की बात है, सुंदरवन नाम का एक खुशहाल राज्य था। वहाँ के राजा वीरेंद्र और रानी देविका अपनी प्रजा से प्रेम करते थे। राजा बहादुर और न्यायप्रिय थे, जबक...

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खरी खरी By Dr Sandip Awasthi

वैचारिकी :-     धार्मिकता,लेखक और हिप्पोक्रेट बुद्धिजीवी ---------------------------------------   एक लेखक ,विचारक की धार्मिक दृष्टि भी होती ही है।भले ही बाद में चार...

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कुर्सी के कवि By Deepak sharma

                    “श्री विशेश्वर नाथ घर पर हैं क्या?” बाहर चूड़ियों की खनखनाहट के साथ मधुर एक स्त्री- स्वर खनका। &nb...

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भाग्य By Vandna Sharma

कहानी - भाग्यसोहन एक बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी में मैनेजर था। उसकी पत्नी सुधा, पढ़ी-लिखी, समझदार और सुलझे विचारों वाली महिला थी। शादी के बाद जब बेटा हुआ, तो सुधा ने एक बड़ा फैसला लिया।...

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खिड़की और बच्चें By Piyush Goel

प्रथम श्रेणी के रिटायर्ड ईमानदार सरकारी कर्मचारी के दो बेटे और एक बेटी थी.सभी बच्चों की परवरिश बहुत ही अच्छे तरीके से हुई थी. बड़ा बेटा सॉफ्टवेर इंजीनियर अमरीका में रहता था,बीटियाँ...

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आप ऊपर ही बिराजिये By Neelam Kulshreshtha

[    नीलम कुलश्रेष्ठ    ]              ये कार्यालय आम सरकारी  कार्यालय  जैसा है। कौन  से प्रदेश का ? और कौन &n...

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बाबूजी की विपरीत सीख By Deepak sharma

               जीजी की शादी के बाद जीजी से ज़्यादा बदलाव बाबूजी में आया।                कहां तो वह ज...

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करवाचौथ की शॉपिंग By Vandna Sharma

सिया बालकनी में खड़ी होकर अपने पति को ऑफिस जाते हुए देख रही थी। सुबह की हल्की धूप उसके चेहरे पर पड़ रही थी। उसने हाथ हिलाकर मुस्कुराते हुए बाय कहा। तभी साथ वाले फ्लैट की पड़ोसन अपन...

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पता बताते दिन By महेश रौतेला

पता बताते दिन:नैनीताल को देखकर एक अद्भुत अनुभूति मन में उत्पन होती है।एक विदेशी ने हाल में ही कहा है," मैंने इतनी सुन्दर जगह और नहीं देखी है यदि यहाँ की कचरे पर ध्यान न दिया जाय।" ...

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ड्राफ्ट में अटकी एक कहानी By Swagata Chakraborty

शिल्पा प्रतिलिपि पर लिखती थी। एक छोटी सी राइटर, पर शब्दों से बड़ी दुनिया बुनती थी।एक दिन उसके मन में आया, क्यों न प्रतिलिपि के साथ-साथ अपनी कहानियाँ और भी कहीं ले जाऊँ? बस फिर क्या...

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अलमारी By Vandna Sharma

सुबह के साढ़े सात बजे थे। रीना ने अदरक वाली चाय बनाकर रवि को थमाई और बहुत हिम्मत जुटाकर बोली, "सुनो, मुझे एक छोटी सी अलमारी चाहिए। मेरा कॉस्मेटिक का सामान, क्रीम-पाउडर, पर्स सब बेड...

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मुकम्मल By Shivam Dhuriya

पंद्रह साल पहले बिछड़े राघव और अवनी की कहानी, जिसे वक्त और परिस्थितियां कभी खत्म नहीं कर पाईं। एक पुरानी नीली चूड़ी अचानक दोनों को फिर आमने-सामने ला खड़ा करती है और उन्हें एहसास हो...

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किनारा By Rajeev kumar

    जल की कलकल करती जलधारा प्रबल वेग से बढ़ रही थी। पत्थर पर जल का प्रहार लगातार हो रहा था। यहाँ-वहाँ अटकी हुई जलकुम्भी भी जकड़न से मुक्त हो बह रहा था। छोटे बच्चे बड़ी सावधानी से अपनी...

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मेरी जिंदगी का सफर 10 By Ankit Khatri

      आज मैं जहाँ हूँ… और आगे की उम्मीद हर सफर की एक शुरुआत होती है।कुछ रास्ते आसान होते हैं और कुछ रास्ते ऐसे होते हैं, जिन पर चलते हुए इंसान कई बार खुद से ही पूछता है—“मैं आखिर ज...

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बुंदकी की छींट By Deepak sharma

                 “दो रोटी आज कम क्यों खायी?”    अम्मा ने पूछा।              &n...

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चेतना By Rajeev kumar

  किसी का मन मसोस कर रह जाना किसी के लिए बड़ी ही प्रसन्नता की बात होती है। किसी का हार जाना, न जाने क्यों जलने वालों को जीत की अनुभूति करवा देता है। क्यों किसी का कुछ बिगड़ जाना, किस...

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एहसास By Rajeev kumar

  पहले तो गुजाराभत्ता के नाम पर अड़ी रही सुहानी। मनोज अपने सामर्थ्य को देखते हुए इतनी बड़ी रकम के लिए हामी भरी थी। सुहानी और बेटी काव्या के भविष्य को लेकर चिंतीत थी और वो इस बात को ल...

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देश की शान-सेना का जवान By Piyush Goel

एक गाँव में रामसेवक नाम का किसान रहता था,बड़ा ही मेहनती, अपने परिवार में माता पिता की सेवा और अपनी खेती पर पूरा ध्यान, अपने माँ बाप के इकलौते बेटे थे।रामसेवक हमेशा यही सोचते रहते थ...

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टके कोस By Deepak sharma

                  “मलकिन आप को उधर बुला रही हैं,” किशोरीलाल मेरे कमरे में आन खड़ा हुआ।          &n...

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एक माँ का संकल्प By Piyush Goel

M एक माँ का संकल्प मेरा एक मित्र,जिसका नाम कपिल हैं,और मेरे घर से खिची दूरी पर किरायें के मकान में रहते हैं।आजकल एक खेल समाज में बड़ी तेजी से अपनी जगह बना रहा हैं, उस खेल का नाम है...

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चुगली By Rajeev kumar

      शनैः शनैः गतिरोध बढ़ता जा रहा था। गतिरोध तन का नहीं, बल्कि गतिरोध मन का बढ़ता जा रहा था। वो तो शिथील सी चाल से चल रहा था लेकिन उसकी इच्छाएं मानो विमान पर सवार हो। शारिरिक परेशा...

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बाबूजी की हिचकी By Deepak sharma

                  बाबूजी बिस्तर पर लेटे हुए थे। मुझे देखते ही उठ कर बैठ लिए।                &nb...

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ख़ुशी By Piyush Goel

सूरतगढ़ कस्बे में एक मध्यवर्गीय परिवार रहता था, जिनका अपना पुस्तेनी पंसारी का काम था,कस्बे में सेठ का नाम था.काम भी बहुत अच्छा था, सेठ के एक बेटा और एक बेटी थी.सेठ को खाना बनाने का...

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घुमक्कड़ By Rajeev kumar

घुमना तो अच्छा होता ही है बसर्ते घुमने को घुमने जैसा घुमा जाए। न कोई काम का बोझ, न दिमाग पर कोई बोझ ओर न हाथ में किसी भारी सामान का बोझ। घुमना मतलब कहीं जल्दी पहुंचना नहीं बल्कि धी...

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चाँद, सितारा, अँधेरी रात और मैं By Shivam Dhuriya

चारों तरफ पसरा गहरा, बेआवाज़ सन्नाटा और उस सन्नाटे को चीरती ठंडी हवा। आसमान की स्याह चादर पर दूर कहीं एक चमकता चाँद और उसकी महफ़िल सजाए अनगिनत टिमटिमाते सितारे।
यह कोई तन्हाई नहीं,...

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रिकवरी एजेंट By Rajeev kumar

    अफरातफरी मचते ही लोग सिर पर पाँव रख कर भागे। लोगों के कदमों की तेज ध्वनी गुंजायमान थी। कम्पन ऐसा हो रहा था मानो धरती काँप रही हो। कदमों को कहाँ मालूम था कि कुचला जाने वाला आदमी...

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इन्तजार By Rajeev kumar

. वार्डन ने आकर कहा ’’ मिलने का समय अब सामप्त हुआ। ’’ तो दोनों वार्डन की बात पर भौचक्के भी हुए और गुस्साए भी। कहने के लिए तो बहुत कुछ बचा था, मगर क्या कर सकते थे, वार्डन ठहरा सरकार...

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नाम बदलाई By Deepak sharma

                   उन्हें अपना पहला नाम, हीरालाल, 15 मार्च 1909 को मिला था। जब वह लाला मगनलाल  के घर पैदा हुए थे।   &nbs...

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सच By Rajeev kumar

  सच सच जानना था, सो चुपचाप हो गया। पता है, चुप होकर किसी के अन्दर से सच निकालने की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। दरअसल ऐसी आग लगा दी थी, साँप-छुछुंदर वाला हाल हो गया था, न निगलते...

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कथनी और करनी By Vandna Sharma

कहानी - कथनी और करनीरोहित बहुत ही धार्मिक व्यक्ति था। सबकी सहायता के लिए हमेशा तैयार रहता। मोहल्ले में उसकी गिनती एक अच्छे बेटे और अच्छे भाई के रूप में होती थी, पर वह एक अच्छा पति...

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प्यार की साज़िश By Bihari Lal Chouhan

प्यार की जोखिमएक रोमांटिक-सस्पेंस फिल्म की कहानीशैली: Romance | Suspense | Drama | Action | Emotionअनुमानित अवधि: लगभग 60 मिनटमुख्य पात्र:आरव — 29 वर्ष, तेज-तर्रार, ईमानदार लेकिन ज...

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जल-समाधि By Virendra Dewangan

‘‘ओय अम्मा...ओय काकी...ओय दीदी...ओय मामी...! जरा घूंघट तो उठाओ!! कैमरे में आपलोगों का चेहरा सही से नहीं आ रहा है। कैमरे में चेहरा नहीं आएगा, तो तुम्हें कौन पहचानेगा? तुम्हारा दर्द...

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तुम हो तो सब कुछ है - भाग 8 By Ankit Khatri

प्यार को नाम मिले अभी कुछ ही दिन हुए थे।आरव और नैना ने अपने रिश्ते को लेकर एक बात साफ तय कर ली थी—वे जल्दबाजी नहीं करेंगे, अपने परिवारों का सम्मान करेंगे और अपने करियर को भी उतनी ह...

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सुख-चैन By Rajeev kumar

मंगरू ने बैठे-बैठे सोचा कि घर के लोगों के सुख-चैन की पूर्ति करना ही नियती है, क्या यही जीवन है। अगर यही जीवन है तो कैसा यह जीवन है। अपनी पसंद का कुछ कर नहीं सकता, कुछ खरीद नहीं सकत...

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काल-दोष By Deepak sharma

                सर्द दिसंबर की उस तेरहवीं तारीख को विलंब के कारण हिमगिरि एक्सप्रेस पठानकोट से लखनऊ रात में नौ पैंतीस पर पहुंची।   &nbsp...

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कर्त्तव्य By Rajeev kumar

  भयंकर गर्मी से निजात पाने के लिए सब अपने-अपने तरह से कोशिश कर रहे थे। सुर्यदेव की उग्रता के सामने सब नतमस्तक थे। आलम यह था कि सुर्यदेव जो सुबह उग्र होते थे तो उनका गुस्सा शाम को...

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स्कूल की छुट्टी और बारिश By Vandna Sharma

अदिति किचन में जल्दी-जल्दी हाथ चला रही थी। दीवार घड़ी में एक बज रहा था। डेढ़ बजे अर्णव की छुट्टी होनी थी।बाहर सुबह से झिम-झिम बारिश हो रही थी, जो रुकने का नाम ही नहीं ले रही थी। का...

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आज्ञा By Rajeev kumar

  प्रताप ने कुछ देर रूक कर कुछ गहरा सोचा और आगे बढ़ गया, धड़कन सामान्य हो चली थी और पसीने की बुंदे उसके रूमाल में समा चुकी थीं लेकिन कुछ सोच तो वह अब भी रहा था। प्रताप के ललाट के ऊपर...

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raja virandr ki love story By Dheeraj kumar Kashyap

राजा वीरेंद्र और रानी देविकाएक समय की बात है, सुंदरवन नाम का एक खुशहाल राज्य था। वहाँ के राजा वीरेंद्र और रानी देविका अपनी प्रजा से प्रेम करते थे। राजा बहादुर और न्यायप्रिय थे, जबक...

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खरी खरी By Dr Sandip Awasthi

वैचारिकी :-     धार्मिकता,लेखक और हिप्पोक्रेट बुद्धिजीवी ---------------------------------------   एक लेखक ,विचारक की धार्मिक दृष्टि भी होती ही है।भले ही बाद में चार...

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कुर्सी के कवि By Deepak sharma

                    “श्री विशेश्वर नाथ घर पर हैं क्या?” बाहर चूड़ियों की खनखनाहट के साथ मधुर एक स्त्री- स्वर खनका। &nb...

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भाग्य By Vandna Sharma

कहानी - भाग्यसोहन एक बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी में मैनेजर था। उसकी पत्नी सुधा, पढ़ी-लिखी, समझदार और सुलझे विचारों वाली महिला थी। शादी के बाद जब बेटा हुआ, तो सुधा ने एक बड़ा फैसला लिया।...

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खिड़की और बच्चें By Piyush Goel

प्रथम श्रेणी के रिटायर्ड ईमानदार सरकारी कर्मचारी के दो बेटे और एक बेटी थी.सभी बच्चों की परवरिश बहुत ही अच्छे तरीके से हुई थी. बड़ा बेटा सॉफ्टवेर इंजीनियर अमरीका में रहता था,बीटियाँ...

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आप ऊपर ही बिराजिये By Neelam Kulshreshtha

[    नीलम कुलश्रेष्ठ    ]              ये कार्यालय आम सरकारी  कार्यालय  जैसा है। कौन  से प्रदेश का ? और कौन &n...

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बाबूजी की विपरीत सीख By Deepak sharma

               जीजी की शादी के बाद जीजी से ज़्यादा बदलाव बाबूजी में आया।                कहां तो वह ज...

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करवाचौथ की शॉपिंग By Vandna Sharma

सिया बालकनी में खड़ी होकर अपने पति को ऑफिस जाते हुए देख रही थी। सुबह की हल्की धूप उसके चेहरे पर पड़ रही थी। उसने हाथ हिलाकर मुस्कुराते हुए बाय कहा। तभी साथ वाले फ्लैट की पड़ोसन अपन...

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पता बताते दिन By महेश रौतेला

पता बताते दिन:नैनीताल को देखकर एक अद्भुत अनुभूति मन में उत्पन होती है।एक विदेशी ने हाल में ही कहा है," मैंने इतनी सुन्दर जगह और नहीं देखी है यदि यहाँ की कचरे पर ध्यान न दिया जाय।" ...

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ड्राफ्ट में अटकी एक कहानी By Swagata Chakraborty

शिल्पा प्रतिलिपि पर लिखती थी। एक छोटी सी राइटर, पर शब्दों से बड़ी दुनिया बुनती थी।एक दिन उसके मन में आया, क्यों न प्रतिलिपि के साथ-साथ अपनी कहानियाँ और भी कहीं ले जाऊँ? बस फिर क्या...

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अलमारी By Vandna Sharma

सुबह के साढ़े सात बजे थे। रीना ने अदरक वाली चाय बनाकर रवि को थमाई और बहुत हिम्मत जुटाकर बोली, "सुनो, मुझे एक छोटी सी अलमारी चाहिए। मेरा कॉस्मेटिक का सामान, क्रीम-पाउडर, पर्स सब बेड...

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मुकम्मल By Shivam Dhuriya

पंद्रह साल पहले बिछड़े राघव और अवनी की कहानी, जिसे वक्त और परिस्थितियां कभी खत्म नहीं कर पाईं। एक पुरानी नीली चूड़ी अचानक दोनों को फिर आमने-सामने ला खड़ा करती है और उन्हें एहसास हो...

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किनारा By Rajeev kumar

    जल की कलकल करती जलधारा प्रबल वेग से बढ़ रही थी। पत्थर पर जल का प्रहार लगातार हो रहा था। यहाँ-वहाँ अटकी हुई जलकुम्भी भी जकड़न से मुक्त हो बह रहा था। छोटे बच्चे बड़ी सावधानी से अपनी...

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मेरी जिंदगी का सफर 10 By Ankit Khatri

      आज मैं जहाँ हूँ… और आगे की उम्मीद हर सफर की एक शुरुआत होती है।कुछ रास्ते आसान होते हैं और कुछ रास्ते ऐसे होते हैं, जिन पर चलते हुए इंसान कई बार खुद से ही पूछता है—“मैं आखिर ज...

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बुंदकी की छींट By Deepak sharma

                 “दो रोटी आज कम क्यों खायी?”    अम्मा ने पूछा।              &n...

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चेतना By Rajeev kumar

  किसी का मन मसोस कर रह जाना किसी के लिए बड़ी ही प्रसन्नता की बात होती है। किसी का हार जाना, न जाने क्यों जलने वालों को जीत की अनुभूति करवा देता है। क्यों किसी का कुछ बिगड़ जाना, किस...

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एहसास By Rajeev kumar

  पहले तो गुजाराभत्ता के नाम पर अड़ी रही सुहानी। मनोज अपने सामर्थ्य को देखते हुए इतनी बड़ी रकम के लिए हामी भरी थी। सुहानी और बेटी काव्या के भविष्य को लेकर चिंतीत थी और वो इस बात को ल...

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देश की शान-सेना का जवान By Piyush Goel

एक गाँव में रामसेवक नाम का किसान रहता था,बड़ा ही मेहनती, अपने परिवार में माता पिता की सेवा और अपनी खेती पर पूरा ध्यान, अपने माँ बाप के इकलौते बेटे थे।रामसेवक हमेशा यही सोचते रहते थ...

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टके कोस By Deepak sharma

                  “मलकिन आप को उधर बुला रही हैं,” किशोरीलाल मेरे कमरे में आन खड़ा हुआ।          &n...

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एक माँ का संकल्प By Piyush Goel

M एक माँ का संकल्प मेरा एक मित्र,जिसका नाम कपिल हैं,और मेरे घर से खिची दूरी पर किरायें के मकान में रहते हैं।आजकल एक खेल समाज में बड़ी तेजी से अपनी जगह बना रहा हैं, उस खेल का नाम है...

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चुगली By Rajeev kumar

      शनैः शनैः गतिरोध बढ़ता जा रहा था। गतिरोध तन का नहीं, बल्कि गतिरोध मन का बढ़ता जा रहा था। वो तो शिथील सी चाल से चल रहा था लेकिन उसकी इच्छाएं मानो विमान पर सवार हो। शारिरिक परेशा...

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बाबूजी की हिचकी By Deepak sharma

                  बाबूजी बिस्तर पर लेटे हुए थे। मुझे देखते ही उठ कर बैठ लिए।                &nb...

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ख़ुशी By Piyush Goel

सूरतगढ़ कस्बे में एक मध्यवर्गीय परिवार रहता था, जिनका अपना पुस्तेनी पंसारी का काम था,कस्बे में सेठ का नाम था.काम भी बहुत अच्छा था, सेठ के एक बेटा और एक बेटी थी.सेठ को खाना बनाने का...

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घुमक्कड़ By Rajeev kumar

घुमना तो अच्छा होता ही है बसर्ते घुमने को घुमने जैसा घुमा जाए। न कोई काम का बोझ, न दिमाग पर कोई बोझ ओर न हाथ में किसी भारी सामान का बोझ। घुमना मतलब कहीं जल्दी पहुंचना नहीं बल्कि धी...

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चाँद, सितारा, अँधेरी रात और मैं By Shivam Dhuriya

चारों तरफ पसरा गहरा, बेआवाज़ सन्नाटा और उस सन्नाटे को चीरती ठंडी हवा। आसमान की स्याह चादर पर दूर कहीं एक चमकता चाँद और उसकी महफ़िल सजाए अनगिनत टिमटिमाते सितारे।
यह कोई तन्हाई नहीं,...

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रिकवरी एजेंट By Rajeev kumar

    अफरातफरी मचते ही लोग सिर पर पाँव रख कर भागे। लोगों के कदमों की तेज ध्वनी गुंजायमान थी। कम्पन ऐसा हो रहा था मानो धरती काँप रही हो। कदमों को कहाँ मालूम था कि कुचला जाने वाला आदमी...

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इन्तजार By Rajeev kumar

. वार्डन ने आकर कहा ’’ मिलने का समय अब सामप्त हुआ। ’’ तो दोनों वार्डन की बात पर भौचक्के भी हुए और गुस्साए भी। कहने के लिए तो बहुत कुछ बचा था, मगर क्या कर सकते थे, वार्डन ठहरा सरकार...

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नाम बदलाई By Deepak sharma

                   उन्हें अपना पहला नाम, हीरालाल, 15 मार्च 1909 को मिला था। जब वह लाला मगनलाल  के घर पैदा हुए थे।   &nbs...

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सच By Rajeev kumar

  सच सच जानना था, सो चुपचाप हो गया। पता है, चुप होकर किसी के अन्दर से सच निकालने की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। दरअसल ऐसी आग लगा दी थी, साँप-छुछुंदर वाला हाल हो गया था, न निगलते...

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कथनी और करनी By Vandna Sharma

कहानी - कथनी और करनीरोहित बहुत ही धार्मिक व्यक्ति था। सबकी सहायता के लिए हमेशा तैयार रहता। मोहल्ले में उसकी गिनती एक अच्छे बेटे और अच्छे भाई के रूप में होती थी, पर वह एक अच्छा पति...

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प्यार की साज़िश By Bihari Lal Chouhan

प्यार की जोखिमएक रोमांटिक-सस्पेंस फिल्म की कहानीशैली: Romance | Suspense | Drama | Action | Emotionअनुमानित अवधि: लगभग 60 मिनटमुख्य पात्र:आरव — 29 वर्ष, तेज-तर्रार, ईमानदार लेकिन ज...

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जल-समाधि By Virendra Dewangan

‘‘ओय अम्मा...ओय काकी...ओय दीदी...ओय मामी...! जरा घूंघट तो उठाओ!! कैमरे में आपलोगों का चेहरा सही से नहीं आ रहा है। कैमरे में चेहरा नहीं आएगा, तो तुम्हें कौन पहचानेगा? तुम्हारा दर्द...

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