लघुकथा कहानियाँ पढ़े और PDF में डाउनलोड करे

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Short Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cult...Read More


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अंतिम यात्रा By Vandna Sharma

अंतिम यात्रा  कहानी  'अंतिम यात्रा' शब्द सुनकर ही दिल काँपने लगता है। यह समय सभी को आना है। दुनिया का अंतिम सत्य भी यही है। दुनिया में लाखों लोग रोज मरते हैं। दिल दहल जाता...

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हन्सु के प्रेम की नैया By Rakesh Kumar Sharma

हमारे सभ्य समाज में प्रत्येक व्यक्ति किसी न किसी प्रकार से अपनी आजिविका कमाने के लिए प्रयासरत है। कुछ विशेष प्रवृति के प्राणी भी हमारे इसी समाज में पाये जाते हैं जो दिन-भर कुछ नहीं...

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कॉल - 1 By sky

हर दिन एक ही कॉल, ठीक 12 बजे, और फिर सन्नाटा। और जब भी कोई कॉल उठाए, सिर्फ एक आवाज़  "मुझे क्यों मारा?" ये सिलसिला कुछ सालों तक यूँ ही चला, लेकिन एक दिन कुछ ऐसा हुआ जिसने सब बदल दि...

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कुछ बातें मां बाप के दिल की । - 3 By miss k

आपको पता ही होगा की थोड़े दिन पहले ही फ़ादर्स डे गया तभी मेरे मन में एक विचार आया कि पापा तो रोज ही स्पेशल होते हैं तो फिर फ़ादर्स डे मनाने की तो कोई जरूरत हे ही नहीं। पहले इतना को...

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तैयारी के भंवर में कैद जवानी By Kapil Tiwari

आज मन काफी उदास है। मुझे प्रयागराज के एक छोटे से कमरे में रहते हुए लगभग तीन साल हो गए हैं। इस बंद कमरे में रहते-रहते अब मन में बार-बार यही सवाल उठता है कि आखिर और कब तक? कब तक सरका...

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देसी जुगाड बड़ा कमाल By Vandna Sharma

लोक कथा  देशी जुगाड बड़ा कमाल एक समय की बात है। किसी गाँव में एक पंडित जी रहते थे। वो थोड़ा कम पढ़े-लिखे थे लेकिन बुद्धि बहुत थी उनके पास। आध्यात्मिक ज्ञान भी था। गाँव में उनके ज्ञ...

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दंगा By Virendra Devangan

एक नगर में जाने किस बात पर दंगा भड़का कि दंगाई खून की होली खेलने लगे। वहां देखते-ही-देखते रक्तरंजित लाशें बिछ गईं। जबरदस्त आगजनी हुई। घर-के-घर फूंक डाले गए। मोटरगाड़ियां धू-धू कर जल...

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बुआ By Vandna Sharma

---बुआ - महक की कहानी आज सबसे उपेक्षित रिश्ता है बुआ। कोई नहीं बुलाना चाहता बुआ को। बुआ के नाम से ही घर की बहुओं के मुँह बन जाते हैं। पहले होती होंगी बुआ रुआब, मैंने तो आज तक नहीं...

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सजा.....बिना कसूर की - 6 By Soni shakya

तभी भूमि आते हुए दिखाई देती है।आकाश ऐसे खुश होता है मानो कोई खजाना मिल गया हो।भूमि ने चारों ओर नजर फैला कर देखा, उसे कॉर्नर की टेबल पर बैठा हुआ आकाश दिखाई दिया।आकाश ने भी भूमि को द...

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ये सब इतना Complicated क्यों है ? By InkImagination

सब इतना उलझा हुआ क्यों है? यह सवाल अक्सर उन पलों में उठता है जब ज़िंदगी अचानक अपनी रफ्तार बदल देती है। कभी-कभी कोई इंसान हमारी ज़िंदगी में बिना किसी पूर्व सूचना के आता है। शुरूआत ब...

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बहु पुराण By Vandna Sharma

*'बहु-पुराण' - ये कहानी नहीं, हर उस औरत का दस्तावेज है जिसने गाँव की मिट्टी से शहर के अकेलेपन तक का सफर तय किया है।*शीर्षक: बहु-पुराण*  *- सुबह से बारिश हो रही थी। मौसम सुह...

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कोन्निचिवा: माय देसी लव - 2 By Kajal Soam

परिदृश्य: जयपुर की हलचल भरी सड़कें और शिवानी का संघर्ष।जयपुर की दोपहर अपनी पूरी रंगत में थी। हवा में आमेर के किलों की खुशबू और बाज़ारों का शोर घुला हुआ था। शिवानी आज 'सीतापुरा इं...

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अनबुझा चूना By Deepak sharma

                 घड़ी में तीन बजे थे जब जाई बिस्तर से उठ कर बैठ ली थीं।                  &...

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मेरा एक दिन का प्यार By Ubaid ali

( मेरा एक दिन का प्यार )साल 2016 pnb बैंक की लाइन, आपको याद होगा जब हमारे देश में नोटबंदी हुयी थी तो सब लोग नोट बदलवाने के लिए लाइनों में लग रहे थे. इत्तीफाक से मुझे भी पैसे निकालन...

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पढ़ाकू By Vandna Sharma

*'किरन' - ये सिर्फ एक शिष्या की कहानी नहीं है, ये हर उस गुरु की जीत है जो बच्चों में 'इंसान' बनाता है।यह कहानी मेरी शिष्या की है। उससे मेरा परिचय एम.ए. की कक्षा के...

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राई- भर मरहम By Deepak sharma

                  बिजली की तार बेचने वाली अपनी दुकान की सीढ़ियों पर उस छोटे बच्चे को देख कर पहले तो मैं हैरान हुआ।      ...

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सुभीता By Deepak sharma

                मेरे लिए दरवाज़ा बहन ने खोला।                 “और कौन आया है?” अंदर के ब...

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गेंदा रानी By Deepak sharma

लेखिका: दीपक शर्मा                    ड्यूटी रजिस्टर में अपने हस्ताक्षर के साथ मैं ने अपना अराइवल टाइम दर्ज किया : दो बजे।  ...

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मां एक भावना, एहसास By miss k

आज हम बात करने जा रहे हैं एक ऐसा रिश्ता, एहसास, भावना जिसे हर किसी ने महसूस किया ही होगा। कभी डांट तो कभी प्यार बनकर हमें सहलाती ‌। वो एहसास है मां। मां कोई भी हो केसी भी हो अमीर ह...

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खामोश घर की व्यथा By Vandna Sharma

खामोश घर की व्यथाप्रिय पाठकों, क्या मेरी कहानी सुनोगे? मैं अब एक 45 वर्षीय इमारत हूँ। कभी मैं भी घर हुआ करता था। घर तो उसमें रहने वाले व्यक्तियों से ही बनता है ना, बिना सदस्यों के...

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बारह बरश का इंतज़ार - 4 By kusum kumari

किटी... अंकित ने धीरे से कहा “ …कुसुम ने अपनी आंखें खोल दी ! “हम्म।” कुसुम ने धीरे से जवाब दिया ! “तुमने मेरे सवाल का जवाब नहीं दिया।”“क्यों  किया? तुम जवाब देना नहीं चाहती?”“नहीं।...

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चिड़चिड़ा By Vandna Sharma

कहानी *चिड़चिड़ा*कभी-कभी सबको प्यार बाँटने वाला भी प्यार के लिए प्यासा रह जाता है। यह कहानी एक ऐसे युवा की है जो दिल्ली की एमएनसी कंपनी में कार्यरत है। वर्कलोड के चलते हमेशा चिड़चि...

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बंद इंजन By Deepak sharma

                  क्या मैं मृत्युलोक में हूं? स्वर्ग आ पहुंचा हूं?                 धरती और आकाश...

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किराए का घर By Vandna Sharma

**"किराए का घर" -  *लेखिका: डॉ वंदना शर्मा*वर्तमान समय में अपना घर होना भी एक सपना ही है। बढ़ती जनसंख्या और सीमित ज़मीन। डिब्बेनुमा जैसे घर में रहने को मजबूर लोग।यह कहानी है दिल्ली...

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अधूरी कॉल By Kapil Tiwari

मैं बैठा कुछ सोच ही रहा था कि तभी मेरे पीछे रखे मोबाइल से एक जानी-पहचानी सी आवाज़ सुनाई दी। देखा तो घर से फोन आ रहा था—फोन पर वही लोग थे जो समय-समय पर अपनी कामनाओं की 'अपडेट&#3...

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पौधे कितना ऑक्सीजन देते है By Shilpa exam tips

पेड़-पौधे हमारे जीवन की सांस हैं। इनके बिना धरती पर जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। हम हर पल जो ऑक्सीजन लेते हैं, वो हमें पेड़-पौधों से ही मिलती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है...

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जब दिल मिले जानवर से By miss k

दोस्तों आज मैं आपको एक प्यारी सी कहानी सुनाने जा रहा हूं। आशा करता हूं आप सबको पसंद आएगी।एक प्यारी सी बच्ची थी। जिसका नाम था स्विटी बहुत प्यारी और नटखट थी । माता सुशिलाबेन और पिता...

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First Love - 1 By Sah Ankita

खामोश मुलाकात"जिंदगी में कभी-कभी ऐसा मोड़ आता है जब कोई शख्स पहली नजर में ही दिल के तार छेड़ देता है। मेरे साथ भी आज कुछ वैसा ही हुआ। आज मैंने उसे देखा... उसके घर में मेरा पहला...

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मेरी डिग्री बेकार नहीं है By Vandna Sharma

---*मेरी डिग्री बेकार नहीं है *लेखिका: डॉ वंदना शर्मा*वो एक गुनगुनी धूप से सजी सुबह थी। फरवरी माह की महकती सुबह। ठंडी हवाएं शरीर को छूती हुई अच्छी लग रही थीं। धूप अभी इतनी तेज नहीं...

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Mathematics By JUGAL KISHORE SHARMA

ध्रुवीय वक्रों (Polar curves) के नीचे क्षेत्रफल ज्ञात करने के लिए 'सीमाएँ' (limits) तय करना गणित का वह अद्भुत जादू है, जहाँ हम r=0 रखकर ऐसे कोण (θ\thetaθ) ढूँढते हैं, मानो वक्र स्व...

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नानी जी नमस्ते By Vandna Sharma

संस्मरण डॉ वंदना शर्मा पांडव नगर new delhi नानी जी नमस्ते  संसस्मरण नानी जी नमस्ते  *लेखिका: डॉ वंदना शर्मा*मेरी नानी का घर अब सिर्फ यादों में ही है। बरसो बीत गए वहां गए। आखिरी बार...

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बेवकूफ नेता जी By Karan Meena

:- नेता जी: एक नासमझ, अनपढ़ और मजाकिया राजनेता।:- राजू: नेता जी का पीए (Personal Assistant), जो समझदार है पर नेता जी की हरकतों से परेशान रहता है।(दृश्य की शुरुआत: नेता जी अपने घर क...

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जिस जीवन में तुम थे - 2 By SHREYA INDUSHREE

किसी-किसी रात समय सो जाता है।घड़ी चलती रहती है, रात आगे बढ़ती रहती है, लेकिन भीतर कहीं सब कुछ ठहर जाता है।उस रात समर के साथ भी यही हुआ।पत्र लिखने के बाद वह देर तक मेज़ पर बैठा रहा।...

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इश्क. - 18 By om prakash Jain

वेदांत रात में सोते समय गहरी सोच में पड़ जाता है ।सिम्मी के हाथ मांगने के लिए उनके पिता जी से मिलना चाहता है ।और अपना प्रेम कहानी बता देना चाह रहा है ।और सिम्मी भी वेदांत को यही सल...

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गहरा समंदर By Vandna Sharma

---*कहानी: माफ़ करने के लिए नहीं रुके*  *लेखिका: डॉ वंदना शर्मा*दिन ढलने ही वाला था, आसमान में बादल छाए हुए थे। सागर समुद्री तट पर बैठा हुआ, समुद्री लहरों को उछलते हुए देख रहा था।...

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मेरा साहित्य लेखन By Rakesh Kumar Sharma

आज दोपहर को घर के आंगन मे बैठा में आराम कर रहा था। अचानक दिमाग में कुछ लिखने का ख्याल आया। सोचा कुछ अच्छा सा लिखूं। पर क्या लिखना है ये तय नहीं कर पा रहा था। कई बार विचार आया कुछ स...

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तुम्हें भी तो याद आती होगी - 1 By Anil Kundal

                            -१-" माँ, आज मेरा लंच पैक नहीं करना। " मैंने शीशे के सामने खड़े होकर कंघी से अपने बाल संवारे और एकबारगी दर्पण में अपने चेहरे को निहारा। सब कुछ ठीक ठाक स...

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कुंती का खेल By Deepak sharma

                    कुंती को वह खेल अकस्मात ही सूझा था।                   टंडन मेम सा...

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आग और ठहराव - 1 By Alka rahul Aggarwal

मुंबई...एक ऐसा शहर जो कभी नहीं सोता। यहाँ कुछ लोग सपने लेकर आते हैं और कुछ लोगों के सपनों पर राज करते हैं।अनाया उन्हीं लोगों में से थी जो सपने लेकर आई थी।सफेद सलवार-कुर्ते में रहने...

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अलविदा आनंद! By Devendra Kumar

अलविदा आनंद !  जीवन में कुछ चीजें आकस्मिक हो कर बुरी तरह से  झकझोर जाती हैं, जैसे अचानक एक तेज अंधड़ आकर कुछ तोड़ फोड़ कर चला गया फिर सब शांत जैसे कुछ आया  नहीं था, बस हुई हानि को सवा...

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हमसफ़र By Rakesh Kumar Sharma

बदन पर किसी ठंडी चीज का एहसास पाकर मेरी तंद्रा टूटी। विचारों के भंवर से बाहर निकल कर देखा तो सामने निधि बैठी हुई थी, उसके हाथ में बाम की एक डिब्बी थी जिससे वह बाम मेरे गले पर लगा र...

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क्या सब ठीक है - 6 By Narayan Menariya

भीड़ में खोया इंसान...दिल्ली जैसे बड़े शहर की सुबह हमेशा शोर से शुरू होती थी। सड़क पर दौड़ती गाड़ियाँ, बस स्टॉप पर खड़ी लंबी लाइनें, हॉर्न की आवाज़ें और हर चेहरे पर जल्दी का भाव। ऐ...

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मेरे समाज में ऐसा क्यों होता हैं - भाग 2 By Std Maurya

मैं, सत्येंद्र, इस पुस्तक को स्वयं लिख रहा हूँ। मुझे नहीं मालूम कि मेरे विचारों पर लोग कितना विश्वास करेंगे, किंतु मुझे आशा है कि जो भी इस पुस्तक को पढ़ेगा, वह स्वयं सोचने और समाज...

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बेटा { एक हृदयस्पर्शी कहानी } By Anil Kundal

[]  बेटा []                         -१-            " पांच सौ गज जगह है वो। मैं कहती हूँ कि यहीं कहीं आसपड़ोस में कोई बढ़िया सा कमरा दिला देते। तीस पैंतीस हज़ार से क्या कम चढ़ा हुआ...

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अंतिम यात्रा By Vandna Sharma

अंतिम यात्रा  कहानी  'अंतिम यात्रा' शब्द सुनकर ही दिल काँपने लगता है। यह समय सभी को आना है। दुनिया का अंतिम सत्य भी यही है। दुनिया में लाखों लोग रोज मरते हैं। दिल दहल जाता...

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हन्सु के प्रेम की नैया By Rakesh Kumar Sharma

हमारे सभ्य समाज में प्रत्येक व्यक्ति किसी न किसी प्रकार से अपनी आजिविका कमाने के लिए प्रयासरत है। कुछ विशेष प्रवृति के प्राणी भी हमारे इसी समाज में पाये जाते हैं जो दिन-भर कुछ नहीं...

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कॉल - 1 By sky

हर दिन एक ही कॉल, ठीक 12 बजे, और फिर सन्नाटा। और जब भी कोई कॉल उठाए, सिर्फ एक आवाज़  "मुझे क्यों मारा?" ये सिलसिला कुछ सालों तक यूँ ही चला, लेकिन एक दिन कुछ ऐसा हुआ जिसने सब बदल दि...

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कुछ बातें मां बाप के दिल की । - 3 By miss k

आपको पता ही होगा की थोड़े दिन पहले ही फ़ादर्स डे गया तभी मेरे मन में एक विचार आया कि पापा तो रोज ही स्पेशल होते हैं तो फिर फ़ादर्स डे मनाने की तो कोई जरूरत हे ही नहीं। पहले इतना को...

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तैयारी के भंवर में कैद जवानी By Kapil Tiwari

आज मन काफी उदास है। मुझे प्रयागराज के एक छोटे से कमरे में रहते हुए लगभग तीन साल हो गए हैं। इस बंद कमरे में रहते-रहते अब मन में बार-बार यही सवाल उठता है कि आखिर और कब तक? कब तक सरका...

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देसी जुगाड बड़ा कमाल By Vandna Sharma

लोक कथा  देशी जुगाड बड़ा कमाल एक समय की बात है। किसी गाँव में एक पंडित जी रहते थे। वो थोड़ा कम पढ़े-लिखे थे लेकिन बुद्धि बहुत थी उनके पास। आध्यात्मिक ज्ञान भी था। गाँव में उनके ज्ञ...

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दंगा By Virendra Devangan

एक नगर में जाने किस बात पर दंगा भड़का कि दंगाई खून की होली खेलने लगे। वहां देखते-ही-देखते रक्तरंजित लाशें बिछ गईं। जबरदस्त आगजनी हुई। घर-के-घर फूंक डाले गए। मोटरगाड़ियां धू-धू कर जल...

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बुआ By Vandna Sharma

---बुआ - महक की कहानी आज सबसे उपेक्षित रिश्ता है बुआ। कोई नहीं बुलाना चाहता बुआ को। बुआ के नाम से ही घर की बहुओं के मुँह बन जाते हैं। पहले होती होंगी बुआ रुआब, मैंने तो आज तक नहीं...

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सजा.....बिना कसूर की - 6 By Soni shakya

तभी भूमि आते हुए दिखाई देती है।आकाश ऐसे खुश होता है मानो कोई खजाना मिल गया हो।भूमि ने चारों ओर नजर फैला कर देखा, उसे कॉर्नर की टेबल पर बैठा हुआ आकाश दिखाई दिया।आकाश ने भी भूमि को द...

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ये सब इतना Complicated क्यों है ? By InkImagination

सब इतना उलझा हुआ क्यों है? यह सवाल अक्सर उन पलों में उठता है जब ज़िंदगी अचानक अपनी रफ्तार बदल देती है। कभी-कभी कोई इंसान हमारी ज़िंदगी में बिना किसी पूर्व सूचना के आता है। शुरूआत ब...

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बहु पुराण By Vandna Sharma

*'बहु-पुराण' - ये कहानी नहीं, हर उस औरत का दस्तावेज है जिसने गाँव की मिट्टी से शहर के अकेलेपन तक का सफर तय किया है।*शीर्षक: बहु-पुराण*  *- सुबह से बारिश हो रही थी। मौसम सुह...

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कोन्निचिवा: माय देसी लव - 2 By Kajal Soam

परिदृश्य: जयपुर की हलचल भरी सड़कें और शिवानी का संघर्ष।जयपुर की दोपहर अपनी पूरी रंगत में थी। हवा में आमेर के किलों की खुशबू और बाज़ारों का शोर घुला हुआ था। शिवानी आज 'सीतापुरा इं...

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अनबुझा चूना By Deepak sharma

                 घड़ी में तीन बजे थे जब जाई बिस्तर से उठ कर बैठ ली थीं।                  &...

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मेरा एक दिन का प्यार By Ubaid ali

( मेरा एक दिन का प्यार )साल 2016 pnb बैंक की लाइन, आपको याद होगा जब हमारे देश में नोटबंदी हुयी थी तो सब लोग नोट बदलवाने के लिए लाइनों में लग रहे थे. इत्तीफाक से मुझे भी पैसे निकालन...

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पढ़ाकू By Vandna Sharma

*'किरन' - ये सिर्फ एक शिष्या की कहानी नहीं है, ये हर उस गुरु की जीत है जो बच्चों में 'इंसान' बनाता है।यह कहानी मेरी शिष्या की है। उससे मेरा परिचय एम.ए. की कक्षा के...

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राई- भर मरहम By Deepak sharma

                  बिजली की तार बेचने वाली अपनी दुकान की सीढ़ियों पर उस छोटे बच्चे को देख कर पहले तो मैं हैरान हुआ।      ...

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सुभीता By Deepak sharma

                मेरे लिए दरवाज़ा बहन ने खोला।                 “और कौन आया है?” अंदर के ब...

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गेंदा रानी By Deepak sharma

लेखिका: दीपक शर्मा                    ड्यूटी रजिस्टर में अपने हस्ताक्षर के साथ मैं ने अपना अराइवल टाइम दर्ज किया : दो बजे।  ...

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मां एक भावना, एहसास By miss k

आज हम बात करने जा रहे हैं एक ऐसा रिश्ता, एहसास, भावना जिसे हर किसी ने महसूस किया ही होगा। कभी डांट तो कभी प्यार बनकर हमें सहलाती ‌। वो एहसास है मां। मां कोई भी हो केसी भी हो अमीर ह...

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खामोश घर की व्यथा By Vandna Sharma

खामोश घर की व्यथाप्रिय पाठकों, क्या मेरी कहानी सुनोगे? मैं अब एक 45 वर्षीय इमारत हूँ। कभी मैं भी घर हुआ करता था। घर तो उसमें रहने वाले व्यक्तियों से ही बनता है ना, बिना सदस्यों के...

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बारह बरश का इंतज़ार - 4 By kusum kumari

किटी... अंकित ने धीरे से कहा “ …कुसुम ने अपनी आंखें खोल दी ! “हम्म।” कुसुम ने धीरे से जवाब दिया ! “तुमने मेरे सवाल का जवाब नहीं दिया।”“क्यों  किया? तुम जवाब देना नहीं चाहती?”“नहीं।...

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चिड़चिड़ा By Vandna Sharma

कहानी *चिड़चिड़ा*कभी-कभी सबको प्यार बाँटने वाला भी प्यार के लिए प्यासा रह जाता है। यह कहानी एक ऐसे युवा की है जो दिल्ली की एमएनसी कंपनी में कार्यरत है। वर्कलोड के चलते हमेशा चिड़चि...

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बंद इंजन By Deepak sharma

                  क्या मैं मृत्युलोक में हूं? स्वर्ग आ पहुंचा हूं?                 धरती और आकाश...

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किराए का घर By Vandna Sharma

**"किराए का घर" -  *लेखिका: डॉ वंदना शर्मा*वर्तमान समय में अपना घर होना भी एक सपना ही है। बढ़ती जनसंख्या और सीमित ज़मीन। डिब्बेनुमा जैसे घर में रहने को मजबूर लोग।यह कहानी है दिल्ली...

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अधूरी कॉल By Kapil Tiwari

मैं बैठा कुछ सोच ही रहा था कि तभी मेरे पीछे रखे मोबाइल से एक जानी-पहचानी सी आवाज़ सुनाई दी। देखा तो घर से फोन आ रहा था—फोन पर वही लोग थे जो समय-समय पर अपनी कामनाओं की 'अपडेट&#3...

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पौधे कितना ऑक्सीजन देते है By Shilpa exam tips

पेड़-पौधे हमारे जीवन की सांस हैं। इनके बिना धरती पर जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। हम हर पल जो ऑक्सीजन लेते हैं, वो हमें पेड़-पौधों से ही मिलती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है...

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जब दिल मिले जानवर से By miss k

दोस्तों आज मैं आपको एक प्यारी सी कहानी सुनाने जा रहा हूं। आशा करता हूं आप सबको पसंद आएगी।एक प्यारी सी बच्ची थी। जिसका नाम था स्विटी बहुत प्यारी और नटखट थी । माता सुशिलाबेन और पिता...

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First Love - 1 By Sah Ankita

खामोश मुलाकात"जिंदगी में कभी-कभी ऐसा मोड़ आता है जब कोई शख्स पहली नजर में ही दिल के तार छेड़ देता है। मेरे साथ भी आज कुछ वैसा ही हुआ। आज मैंने उसे देखा... उसके घर में मेरा पहला...

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मेरी डिग्री बेकार नहीं है By Vandna Sharma

---*मेरी डिग्री बेकार नहीं है *लेखिका: डॉ वंदना शर्मा*वो एक गुनगुनी धूप से सजी सुबह थी। फरवरी माह की महकती सुबह। ठंडी हवाएं शरीर को छूती हुई अच्छी लग रही थीं। धूप अभी इतनी तेज नहीं...

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Mathematics By JUGAL KISHORE SHARMA

ध्रुवीय वक्रों (Polar curves) के नीचे क्षेत्रफल ज्ञात करने के लिए 'सीमाएँ' (limits) तय करना गणित का वह अद्भुत जादू है, जहाँ हम r=0 रखकर ऐसे कोण (θ\thetaθ) ढूँढते हैं, मानो वक्र स्व...

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नानी जी नमस्ते By Vandna Sharma

संस्मरण डॉ वंदना शर्मा पांडव नगर new delhi नानी जी नमस्ते  संसस्मरण नानी जी नमस्ते  *लेखिका: डॉ वंदना शर्मा*मेरी नानी का घर अब सिर्फ यादों में ही है। बरसो बीत गए वहां गए। आखिरी बार...

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बेवकूफ नेता जी By Karan Meena

:- नेता जी: एक नासमझ, अनपढ़ और मजाकिया राजनेता।:- राजू: नेता जी का पीए (Personal Assistant), जो समझदार है पर नेता जी की हरकतों से परेशान रहता है।(दृश्य की शुरुआत: नेता जी अपने घर क...

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जिस जीवन में तुम थे - 2 By SHREYA INDUSHREE

किसी-किसी रात समय सो जाता है।घड़ी चलती रहती है, रात आगे बढ़ती रहती है, लेकिन भीतर कहीं सब कुछ ठहर जाता है।उस रात समर के साथ भी यही हुआ।पत्र लिखने के बाद वह देर तक मेज़ पर बैठा रहा।...

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इश्क. - 18 By om prakash Jain

वेदांत रात में सोते समय गहरी सोच में पड़ जाता है ।सिम्मी के हाथ मांगने के लिए उनके पिता जी से मिलना चाहता है ।और अपना प्रेम कहानी बता देना चाह रहा है ।और सिम्मी भी वेदांत को यही सल...

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गहरा समंदर By Vandna Sharma

---*कहानी: माफ़ करने के लिए नहीं रुके*  *लेखिका: डॉ वंदना शर्मा*दिन ढलने ही वाला था, आसमान में बादल छाए हुए थे। सागर समुद्री तट पर बैठा हुआ, समुद्री लहरों को उछलते हुए देख रहा था।...

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मेरा साहित्य लेखन By Rakesh Kumar Sharma

आज दोपहर को घर के आंगन मे बैठा में आराम कर रहा था। अचानक दिमाग में कुछ लिखने का ख्याल आया। सोचा कुछ अच्छा सा लिखूं। पर क्या लिखना है ये तय नहीं कर पा रहा था। कई बार विचार आया कुछ स...

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तुम्हें भी तो याद आती होगी - 1 By Anil Kundal

                            -१-" माँ, आज मेरा लंच पैक नहीं करना। " मैंने शीशे के सामने खड़े होकर कंघी से अपने बाल संवारे और एकबारगी दर्पण में अपने चेहरे को निहारा। सब कुछ ठीक ठाक स...

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कुंती का खेल By Deepak sharma

                    कुंती को वह खेल अकस्मात ही सूझा था।                   टंडन मेम सा...

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आग और ठहराव - 1 By Alka rahul Aggarwal

मुंबई...एक ऐसा शहर जो कभी नहीं सोता। यहाँ कुछ लोग सपने लेकर आते हैं और कुछ लोगों के सपनों पर राज करते हैं।अनाया उन्हीं लोगों में से थी जो सपने लेकर आई थी।सफेद सलवार-कुर्ते में रहने...

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अलविदा आनंद! By Devendra Kumar

अलविदा आनंद !  जीवन में कुछ चीजें आकस्मिक हो कर बुरी तरह से  झकझोर जाती हैं, जैसे अचानक एक तेज अंधड़ आकर कुछ तोड़ फोड़ कर चला गया फिर सब शांत जैसे कुछ आया  नहीं था, बस हुई हानि को सवा...

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हमसफ़र By Rakesh Kumar Sharma

बदन पर किसी ठंडी चीज का एहसास पाकर मेरी तंद्रा टूटी। विचारों के भंवर से बाहर निकल कर देखा तो सामने निधि बैठी हुई थी, उसके हाथ में बाम की एक डिब्बी थी जिससे वह बाम मेरे गले पर लगा र...

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क्या सब ठीक है - 6 By Narayan Menariya

भीड़ में खोया इंसान...दिल्ली जैसे बड़े शहर की सुबह हमेशा शोर से शुरू होती थी। सड़क पर दौड़ती गाड़ियाँ, बस स्टॉप पर खड़ी लंबी लाइनें, हॉर्न की आवाज़ें और हर चेहरे पर जल्दी का भाव। ऐ...

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मेरे समाज में ऐसा क्यों होता हैं - भाग 2 By Std Maurya

मैं, सत्येंद्र, इस पुस्तक को स्वयं लिख रहा हूँ। मुझे नहीं मालूम कि मेरे विचारों पर लोग कितना विश्वास करेंगे, किंतु मुझे आशा है कि जो भी इस पुस्तक को पढ़ेगा, वह स्वयं सोचने और समाज...

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बेटा { एक हृदयस्पर्शी कहानी } By Anil Kundal

[]  बेटा []                         -१-            " पांच सौ गज जगह है वो। मैं कहती हूँ कि यहीं कहीं आसपड़ोस में कोई बढ़िया सा कमरा दिला देते। तीस पैंतीस हज़ार से क्या कम चढ़ा हुआ...

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