लघुकथा कहानियाँ पढ़े और PDF में डाउनलोड करे

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Short Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cult...Read More


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  • रिश्तों का बाजार

    रिश्तों का बाज़ारसुमन मुंबई से दो दिन के थका देने वाले सफर के बाद अपने मायके चां...

  • सावन

    सावन की दोपहर लगभग आधी खत्म हो चुकी थी और ढलते सूरज की सुन्हरी रोशनी से नीम की क...

  • राखी सिर्फ धागा नहीं होती

    सावन की रिमझिम फहारों के बीच जब बाज़ार रंग-बिरंगी राखियों से सजे थे, तब राघव अपन...

एक पुरुष—सबके बीच अकेला - 3 By Aloka Patel

भाग ३ — पापा की अपेक्षाएँमिहिर ने सोचा था कि घर का माहौल अब थोड़ा हल्का हो जाएगा।लेकिन जिंदगी में कुछ शांतियाँ सिर्फ तूफान आने से पहले आती हैं।वह दिन भी सामान्य तरीके से शुरू हुआ।स...

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अहमदाबाद के चर्चे By Devendra Kumar

अहमदाबाद के चर्चे            अहमदाबाद में बिताये उन दिनों को भुलाना बड़ा मुश्किल है. तब वह मुसीबत थी कठिन समय था  केवल मेरा ही नहीं बल्कि सभी का. वे कोई सामान्य दिन नहीं थे साधारण स...

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घर की देहरी, पुरुष का दायित्व और सामाजिक ताने By Shivam Kumar Pandey

भारतीय समाज में सदियों से पुरुषों और महिलाओं की भूमिकाओं को लेकर कुछ अघोषित नियम तय रहे हैं। पारंपरिक व्यवस्था में माना जाता रहा है कि पुरुष का मुख्य काम घर से बाहर जाकर आजीविका कम...

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रिश्तों का बाजार By Vandna Sharma

रिश्तों का बाज़ारसुमन मुंबई से दो दिन के थका देने वाले सफर के बाद अपने मायके चांदपुर पहुंची थी। पूरा रास्ता उसके दिल में एक ही अरमान था। भाभी के लिए चूड़ियों का सुंदर सेट, भतीजी के...

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सावन By Rakesh Kumar Sharma

सावन की दोपहर लगभग आधी खत्म हो चुकी थी और ढलते सूरज की सुन्हरी रोशनी से नीम की काली छाया और लम्बी हो चली थी। इसी नीम की छाया में लखपत अपनी चारपाई पर औंधे मुंह लेटा हुआ था। काफी देर...

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आज का समाज, आज के रीति-रिवाज By Aloka Patel

आज का समाज, आज के रीति-रिवाजएक बदलते समाज की कहानीलेखक: अलोका पटेलअध्याय १ — बदलता समयसमय कभी एक जगह ठहरकर नहीं रहता।कल जो बात हमें असामान्य लगती थी, वह आज सामान्य हो गई है। और आज...

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राखी सिर्फ धागा नहीं होती By Nisha Choudhary

सावन की रिमझिम फहारों के बीच जब बाज़ार रंग-बिरंगी राखियों से सजे थे, तब राघव अपनी किताबों की अलमारी के सबसे निचले दराज में एक पुरानी लकड़ी की डिब्बी ढूंढ रहा था।उस डिब्बी में कोई क...

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मुर्दो से प्यार By Vandna Sharma

मीना बहुत दिनों बाद अपने मायके जा रही थी। ट्रेन से उतर कर उसने रिक्शा किया। "भैया, नई बस्ती जाना है।""20 रुपये लगेंगे।" रिक्शा वाला बोला।घर पहुँचकर जैसे ही मीना सामान उतार कर पैसे...

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एक रैगिंग ऐसा भी By Virendra Dewangan

‘‘अबे! कहा न, घुटने को देख। घुटना कहीं का! सिर उठाया, तो मुर्गा बना दूूंगा।’’ मेडिकल कॉलेज, रायपुर में शाम को सीनियर छात्र यश ने जूनियर सरेश को लताड़ा।‘‘जी-जी, देख ही रहा हूं। कितना...

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Anime - 2 By shifa

ભાગ ૧ માં જોયું કે shin sisuk ને પડી નાખી છે ભાગ ૨ , sisuk કહે છે હું બેહોશ નથી થયું તે મને કેમ પાડયું shin કહે છે અરે હું તો તને બચાવ તી હતી. અછા તો તું આ નાના તળાવ માં ડૂબતો હતો...

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मुंह दिखाई का नेग By Vandna Sharma

रीना जब पहली बार ससुराल गई, तो अजब ही रस्म देखी।जुलाई की चिपचिपी गर्मी, उमस भरा मौसम, और उस पर दुल्हन के भारी-भरकम कपड़े, ज्वैलरी। आते ही सास ने दहलीज पर आरती नहीं उतारी, सीधा पूजा...

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बौना जिन्न By Deepak Kumar Tiwari

बौना जिन्नअध्याय 1: मिट्टी का पुराना चिराग और एक अजीब मेहमानगाँव के एक छोटे से और पुराने घर में संजना अपनी बीमार माँ के साथ रहती थी। संजना बहुत ही समझदार और पढ़ने-लिखने की शौकीन लड...

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व्याधि By Deepak sharma

              “एक मरीज़ को आप से बोटौक्स इंजेक्शन दिलाना है,सर,” सुशील कुमार अपने रोगियों के लिए मेरी सेवाएं अक्सर मुझ से मांग लिया क...

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सजा.....बिना कसूर की - 11 By Soni shakya

और जैसे ही दरवाजा खुलता है...सब लोग अंदर प्रवेश कर जाते हैं और अंदर जो नजारा था उसे देखकर सभी लोग हैरान हो जाते है।बेडशीट पर लगा खून ! बेड पर बिखरी  टूटी चूड़ियां !बिखरा कमरा !लड़ख...

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पापा का स्कूटर By Chandni choudhary

पापा का स्कूटरबचपन से लेकर आज तक मैंने पापा को एक स्कूटर के साथ देखा है—वही स्कूटर, जो उनके लिए केवल आने-जाने का साधन नहीं था, बल्कि उनके जीवन की अनेक यादों का साथी था। वह उनका सबस...

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अंग्रेजी स्कूल By Jeetendra

रामप्रसाद की आँखों में आँसू थे, लेकिन होंठों पर मुस्कान। उसने अपने दस साल के बेटे गोविंद को नये स्कूल की यूनिफॉर्म पहनाई। वह यूनिफॉर्म इतनी साफ और महँगी लग रही थी कि रामप्रसाद को अ...

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बंद घर और हमारे पूर्वज By Vandna Sharma

रक्षाबंधन से 10 दिन पहले विनीता ने अपनी जेठानी सरिता को फोन किया - "नमस्ते भाभी। क्या प्रोग्राम है आपका रक्षाबंधन पर। कहां बंधवाओगी राखी।" फोन के उस पार से विनीता की आवाज आई - "गां...

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भूल गया नाम By Virendra Dewangan

85 वर्षीय मनोहर आज अजीब पशोपेश में थे। उन्हें समझ में नहीं आ रहा था कि उनका नाम क्या है? वह अपना नाम जो भूल गए थे।इसके पहले भी वे हालांकि चश्मा, घड़ी, पेन और न जाने क्या-क्या भूल च...

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तिरंगे की कीमत By InkImagination

15 अगस्त की सुबह थी।पूरा शहर तिरंगे के रंगों से सजा हुआ था। कहीं स्कूलों में स्वतंत्रता दिवस की तैयारियाँ चल रही थीं, तो कहीं दुकानों और घरों पर तिरंगे लगे हुए थे।गली में देशभक्ति...

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स्त्री हूँ मैं By Chandni choudhary

स्त्री हूँ मैंस्त्री हूँ मैं, नारी हूँ मैं,देवी हूँ मैं, शक्ति हूँ मैं।महिला हूँ मैं इस धरा की,जग-जीवन की जननी हूँ मैं।कौन मुझे पराजित कर पाएगा?देख ले, हे मेरे पतन के अभिलाषी!मैं न...

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काज-प्रयोजन By Deepak sharma

  यह उन दिनों की बात है जब मोबाइल फ़ोन प्रयोग में नहीं आए थे। सन उन्नीस सौ अठासी की। “मैं कस्बापुर से बोल रहा हूं,” टेलिफ़ोन के दूसरे सिरे से आवाज़ आई, “आप के...

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जिंदगी इतनी बुरी भी नहीं है By Vandna Sharma

जिंदगी इतनी बुरी भी नहीं है _लघुकथा - वंदना शर्मा_रिमझिम सावन बरस रहा था। आसमान में काले बदरा छाए हुए थे। लगता था पूरे दिन बरसेगा आज। पर मीना के चेहरे पर उदासी थी।पूरा दिन बिना मुस...

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आखिरी कोशिश - 1 By Subhan Khan

आखिरी कोशिशEpisode 1 — एक छोटा-सा सपनागाँव के किनारे एक छोटा-सा घर था। घर बहुत बड़ा नहीं था, लेकिन उसमें रहने वाले दो लोगों की दुनिया बहुत बड़ी थी—आरव और उसकी माँ।आरव बारहवीं कक्षा...

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20 जुलाई 2026 - जंतर-मंतर की वह दोपहर By InkImagination

20 जुलाई 2026 — जंतर-मंतर की वह दोपहर"यह कहानी वास्तविक घटनाओं से प्रेरित है। पात्र और संवाद काल्पनिक हैं।"20 जुलाई 2026 सुबह 5:40 बजे वाराणसी जंक्शन"बेटा, वहाँ संभलकर रहना..."माँ...

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महानगर में स्वर्ग की तालाश By Anant Dhish Aman

— हाँ, घर से दूर एक बड़े महानगर में हूँ।हाँ, बड़े महानगर में!— देखे भी हो कभी, या सिर्फ सुना और पढ़ा ही है?— हाँ, सच कह रहा हूँ। महानगर में रहने आया हूँ—पढ़ने और खूब बड़ा इंसान बनन...

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खेल के पार By Deepak sharma

                 मेरे मन में उस डर का बीज शायद तभी रोपा गया था, जब पिछले दिनों पापा मेरे ग्यारहवें जन्मदिन पर मेरे लिए ‘क्लूडो&rs...

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माँ का प्यार By tanu

यह बात वर्ष 2021 की है। उन दिनों मैं बिहार में थी और सरकारी नौकरी की तैयारी कर रही थी। पढ़ाई के बीच जीवन बहुत साधारण ढंग से चल रहा था। तभी हमारे एक रिश्तेदार के यहाँ शादी का निमंत्...

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अधीन राज्य By Deepak sharma

                   इस मकान को उषा अपना अधीन राज्य मान कर चलती है और हम परिवार वालों को अपनी प्रजा।         &nb...

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कहाँ खो गया वह होशियार अजय - 1 By Anamika

एक बार की बात है। एक छोटे से शहर में रहता था एक परिवार। उनके घर में किसी भी चीज की कमी नहीं थी। वह एक छोटा सा परिवार था उसमें केवल पति-पत्नी और उनका एक बेटा रहा करता था । पति का ना...

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औपचारिकता भरे रिश्ते By Vandna Sharma

औपचारिकता भरे रिश्तेसोहन ऑफिस जाते हुए उदास लग रहा था। उसकी आँखों में वो उदासी साफ झलक रही थी जिसे वो छिपाने की कोशिश कर रहा था। उसकी धर्मपत्नी मीना एक अध्यापिका थी। पति-पत्नी का र...

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प्रेम धरो By Deepak sharma

                   वाराणसी से कोई मिलने आया? अपने अभिवादन के साथ ही उषा पिता से पूछ बैठी । बल्लियों उछल रहे अपने दिल को और संभालना...

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AVREE Kahan Gaya By Anmol Mishra

……कुछ लिखने का मन है पता नहीं क्या लिखूँ but लिखना है। — ohkkkkkk, अभी नींद आ रही है but आज रात सोना नहीं है और एक बात है कि I love myself the most butttttt मुझे नहीं पता क्यों मैं...

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दोस्ती By Vandna Sharma

बाजार की एक दुकान के शीशे में रंग-बिरंगे फ्रेंडशिप बैंड चमक रहे थे। सीमा ठिठक गई। उसने दो सुंदर ब्रेसलेट खरीदे और बैग में रख लिए। घर जाने का मन नहीं था तो पास के पार्क में एक खाली...

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कर्मपथ – आत्मा की पुकार By Skp divine

कर्मपथ – आत्मा की पुकारभाग–1 : एक नई सुबहसूरज की पहली किरणें गाँव के खेतों पर बिखर रही थीं। हवा में मिट्टी की सोंधी खुशबू थी और मंदिर की घंटियों की ध्वनि वातावरण को पवित्र बना रही...

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जैसी करनी वैसी भरनी By Devendra Kumar

जैसी करनी वैसी भरनी सुन कर बड़ा दुःख हुआ था कि  मेरा एक पुराना सहयोगी राकेश  सोलंकी  दिल्ली के मैक्स  हॉस्पिटल के आई सी यू में काफी सीरियस हालत में भर्ती कराया गया है . एक दूसरा  पु...

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भूख By Rinki Singh

दिसंबर के अंतिम सप्ताह की वह रात हड्डियाँ जमा देने वाली थी। ठंड ऐसी कि लगता था नसों में दौड़ता हुआ खून भी कहीं रुक-रुक कर चल रहा हो। चारों ओर कोहरा इस तरह पसरा था, मानो धरती ने सफ़...

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होनी थी हो गई By Vandna Sharma

होनी थी हो गईसुबह से बारिश हो रही है। बिजली कड़क रही है।  रीना सुबह अपने बेटे को स्कूल भेज बालकनी में बैठी बारिश को देख रही है। उसने बालकनी में सुंदर सदाबहार, अपराजिता, गेंदा और तु...

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चिता की आग By Dr Sandip Awasthi

  ——————-          आंटी को पिछली बार अंकल के चौथे पे देखा था ।जाने के समय जब मैंने हाथ जोड़कर उनसे विदा ली तो कहने...

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ठुकराईन नयना देवी - 3 By Vandna Sharma

उम्र के तीसरे पड़ाव पर आकर नयनादेवी बिल्कुल शांत हो गई थीं। तीनों बच्चों की शादी के बाद घर खाली-खाली सा हो गया था। दोनों लड़के विदेश जाकर बस गए थे, और बेटी अपनी ससुराल चली गई थी। ब...

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कर्म फल By Vandna Sharma

कर्म फलआसमान में रूई जैसे बादल जगह-जगह बिखरे हुए थे। सूरज ढलने को था। पेड़ का पत्ता भी नहीं हिल रहा था। जुलाई महीने की उमस भरी शाम थी। सरोज अपनी बालकनी में बैठी ढलते हुए सूरज को दे...

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किले का आखिरी पहरेदार By Zero

️ किले का आखिरी पहरेदारसाल 1672...अरावली की पहाड़ियों के बीच बना देवगढ़ का किला उस रात बिल्कुल शांत था। आसमान में काले बादल छाए हुए थे और तेज हवा के कारण किले की दीवारों पर जल रही...

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पीपल के पत्ते By Jeetendra

बारिश  की वह पहली बूँद जब पीपल के पत्ते पर गिरी तो वरुण मिश्रा ठीक उसी पल गाँव की सीमा पर खड़ा था। उसके कंधे पर एक भारी बैग था जिसमें तीन कैमरे पाँच लेंस और एक ज़िंदगी भर की थकान ब...

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मेहमान By Vandna Sharma

मेहमानस्टेशन पर काफी भीड़ थी। सुबह साढ़े 9 बजे भी दिल्ली दौड़ रही थी। यात्री अपनी ट्रेन पकड़ने के लिए भागे जा रहे थे। रिया का टिकट बुक था लेकिन दिल्ली का प्लेटफार्म ही इतना बड़ा है...

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कलयुग का सच By Vandna Sharma

*कलयुग का सच* जुलाई की सुबह थी। रीना ने बच्चों को स्कूल भेजा, किचन समेटा और फिर अपनी माँ को फोन लगाया। फोन उठते ही माँ की आवाज सुनकर रीना चौंक गई। माँ बहुत दुखी और भारी स्वर में बो...

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लोकतंत्र की ज़मीनी सच्चाई - 2 By Std Maurya

शीर्षक ​- *देश के सच्चे नायक और हमारी खामोशी*​क्या आप जानते हैं, सोनम वांगचुक जी ने इस देश को क्या दिया है? और वे आज क्यों भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं?अगर नहीं, तो क्यों नहीं? क्या...

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जमीन का बंटवारा By Vandna Sharma

लघु कथा जमीनएक जमीन से न जाने कितने रिश्ते जुड़े होते हैं, और न जाने कितने स्वार्थ भी। सुरेश के पिताजी पिछले आठ महीनों से बीमार थे। अब वो छोटे बेटे के साथ देहरादून में रहते थे। सुर...

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एक पुरुष—सबके बीच अकेला - 3 By Aloka Patel

भाग ३ — पापा की अपेक्षाएँमिहिर ने सोचा था कि घर का माहौल अब थोड़ा हल्का हो जाएगा।लेकिन जिंदगी में कुछ शांतियाँ सिर्फ तूफान आने से पहले आती हैं।वह दिन भी सामान्य तरीके से शुरू हुआ।स...

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अहमदाबाद के चर्चे By Devendra Kumar

अहमदाबाद के चर्चे            अहमदाबाद में बिताये उन दिनों को भुलाना बड़ा मुश्किल है. तब वह मुसीबत थी कठिन समय था  केवल मेरा ही नहीं बल्कि सभी का. वे कोई सामान्य दिन नहीं थे साधारण स...

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घर की देहरी, पुरुष का दायित्व और सामाजिक ताने By Shivam Kumar Pandey

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रिश्तों का बाजार By Vandna Sharma

रिश्तों का बाज़ारसुमन मुंबई से दो दिन के थका देने वाले सफर के बाद अपने मायके चांदपुर पहुंची थी। पूरा रास्ता उसके दिल में एक ही अरमान था। भाभी के लिए चूड़ियों का सुंदर सेट, भतीजी के...

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सावन By Rakesh Kumar Sharma

सावन की दोपहर लगभग आधी खत्म हो चुकी थी और ढलते सूरज की सुन्हरी रोशनी से नीम की काली छाया और लम्बी हो चली थी। इसी नीम की छाया में लखपत अपनी चारपाई पर औंधे मुंह लेटा हुआ था। काफी देर...

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आज का समाज, आज के रीति-रिवाज By Aloka Patel

आज का समाज, आज के रीति-रिवाजएक बदलते समाज की कहानीलेखक: अलोका पटेलअध्याय १ — बदलता समयसमय कभी एक जगह ठहरकर नहीं रहता।कल जो बात हमें असामान्य लगती थी, वह आज सामान्य हो गई है। और आज...

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राखी सिर्फ धागा नहीं होती By Nisha Choudhary

सावन की रिमझिम फहारों के बीच जब बाज़ार रंग-बिरंगी राखियों से सजे थे, तब राघव अपनी किताबों की अलमारी के सबसे निचले दराज में एक पुरानी लकड़ी की डिब्बी ढूंढ रहा था।उस डिब्बी में कोई क...

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मुर्दो से प्यार By Vandna Sharma

मीना बहुत दिनों बाद अपने मायके जा रही थी। ट्रेन से उतर कर उसने रिक्शा किया। "भैया, नई बस्ती जाना है।""20 रुपये लगेंगे।" रिक्शा वाला बोला।घर पहुँचकर जैसे ही मीना सामान उतार कर पैसे...

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एक रैगिंग ऐसा भी By Virendra Dewangan

‘‘अबे! कहा न, घुटने को देख। घुटना कहीं का! सिर उठाया, तो मुर्गा बना दूूंगा।’’ मेडिकल कॉलेज, रायपुर में शाम को सीनियर छात्र यश ने जूनियर सरेश को लताड़ा।‘‘जी-जी, देख ही रहा हूं। कितना...

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मुंह दिखाई का नेग By Vandna Sharma

रीना जब पहली बार ससुराल गई, तो अजब ही रस्म देखी।जुलाई की चिपचिपी गर्मी, उमस भरा मौसम, और उस पर दुल्हन के भारी-भरकम कपड़े, ज्वैलरी। आते ही सास ने दहलीज पर आरती नहीं उतारी, सीधा पूजा...

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बौना जिन्न By Deepak Kumar Tiwari

बौना जिन्नअध्याय 1: मिट्टी का पुराना चिराग और एक अजीब मेहमानगाँव के एक छोटे से और पुराने घर में संजना अपनी बीमार माँ के साथ रहती थी। संजना बहुत ही समझदार और पढ़ने-लिखने की शौकीन लड...

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व्याधि By Deepak sharma

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सजा.....बिना कसूर की - 11 By Soni shakya

और जैसे ही दरवाजा खुलता है...सब लोग अंदर प्रवेश कर जाते हैं और अंदर जो नजारा था उसे देखकर सभी लोग हैरान हो जाते है।बेडशीट पर लगा खून ! बेड पर बिखरी  टूटी चूड़ियां !बिखरा कमरा !लड़ख...

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पापा का स्कूटर By Chandni choudhary

पापा का स्कूटरबचपन से लेकर आज तक मैंने पापा को एक स्कूटर के साथ देखा है—वही स्कूटर, जो उनके लिए केवल आने-जाने का साधन नहीं था, बल्कि उनके जीवन की अनेक यादों का साथी था। वह उनका सबस...

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अंग्रेजी स्कूल By Jeetendra

रामप्रसाद की आँखों में आँसू थे, लेकिन होंठों पर मुस्कान। उसने अपने दस साल के बेटे गोविंद को नये स्कूल की यूनिफॉर्म पहनाई। वह यूनिफॉर्म इतनी साफ और महँगी लग रही थी कि रामप्रसाद को अ...

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बंद घर और हमारे पूर्वज By Vandna Sharma

रक्षाबंधन से 10 दिन पहले विनीता ने अपनी जेठानी सरिता को फोन किया - "नमस्ते भाभी। क्या प्रोग्राम है आपका रक्षाबंधन पर। कहां बंधवाओगी राखी।" फोन के उस पार से विनीता की आवाज आई - "गां...

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भूल गया नाम By Virendra Dewangan

85 वर्षीय मनोहर आज अजीब पशोपेश में थे। उन्हें समझ में नहीं आ रहा था कि उनका नाम क्या है? वह अपना नाम जो भूल गए थे।इसके पहले भी वे हालांकि चश्मा, घड़ी, पेन और न जाने क्या-क्या भूल च...

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तिरंगे की कीमत By InkImagination

15 अगस्त की सुबह थी।पूरा शहर तिरंगे के रंगों से सजा हुआ था। कहीं स्कूलों में स्वतंत्रता दिवस की तैयारियाँ चल रही थीं, तो कहीं दुकानों और घरों पर तिरंगे लगे हुए थे।गली में देशभक्ति...

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स्त्री हूँ मैं By Chandni choudhary

स्त्री हूँ मैंस्त्री हूँ मैं, नारी हूँ मैं,देवी हूँ मैं, शक्ति हूँ मैं।महिला हूँ मैं इस धरा की,जग-जीवन की जननी हूँ मैं।कौन मुझे पराजित कर पाएगा?देख ले, हे मेरे पतन के अभिलाषी!मैं न...

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काज-प्रयोजन By Deepak sharma

  यह उन दिनों की बात है जब मोबाइल फ़ोन प्रयोग में नहीं आए थे। सन उन्नीस सौ अठासी की। “मैं कस्बापुर से बोल रहा हूं,” टेलिफ़ोन के दूसरे सिरे से आवाज़ आई, “आप के...

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जिंदगी इतनी बुरी भी नहीं है By Vandna Sharma

जिंदगी इतनी बुरी भी नहीं है _लघुकथा - वंदना शर्मा_रिमझिम सावन बरस रहा था। आसमान में काले बदरा छाए हुए थे। लगता था पूरे दिन बरसेगा आज। पर मीना के चेहरे पर उदासी थी।पूरा दिन बिना मुस...

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आखिरी कोशिश - 1 By Subhan Khan

आखिरी कोशिशEpisode 1 — एक छोटा-सा सपनागाँव के किनारे एक छोटा-सा घर था। घर बहुत बड़ा नहीं था, लेकिन उसमें रहने वाले दो लोगों की दुनिया बहुत बड़ी थी—आरव और उसकी माँ।आरव बारहवीं कक्षा...

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20 जुलाई 2026 - जंतर-मंतर की वह दोपहर By InkImagination

20 जुलाई 2026 — जंतर-मंतर की वह दोपहर"यह कहानी वास्तविक घटनाओं से प्रेरित है। पात्र और संवाद काल्पनिक हैं।"20 जुलाई 2026 सुबह 5:40 बजे वाराणसी जंक्शन"बेटा, वहाँ संभलकर रहना..."माँ...

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महानगर में स्वर्ग की तालाश By Anant Dhish Aman

— हाँ, घर से दूर एक बड़े महानगर में हूँ।हाँ, बड़े महानगर में!— देखे भी हो कभी, या सिर्फ सुना और पढ़ा ही है?— हाँ, सच कह रहा हूँ। महानगर में रहने आया हूँ—पढ़ने और खूब बड़ा इंसान बनन...

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खेल के पार By Deepak sharma

                 मेरे मन में उस डर का बीज शायद तभी रोपा गया था, जब पिछले दिनों पापा मेरे ग्यारहवें जन्मदिन पर मेरे लिए ‘क्लूडो&rs...

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माँ का प्यार By tanu

यह बात वर्ष 2021 की है। उन दिनों मैं बिहार में थी और सरकारी नौकरी की तैयारी कर रही थी। पढ़ाई के बीच जीवन बहुत साधारण ढंग से चल रहा था। तभी हमारे एक रिश्तेदार के यहाँ शादी का निमंत्...

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अधीन राज्य By Deepak sharma

                   इस मकान को उषा अपना अधीन राज्य मान कर चलती है और हम परिवार वालों को अपनी प्रजा।         &nb...

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कहाँ खो गया वह होशियार अजय - 1 By Anamika

एक बार की बात है। एक छोटे से शहर में रहता था एक परिवार। उनके घर में किसी भी चीज की कमी नहीं थी। वह एक छोटा सा परिवार था उसमें केवल पति-पत्नी और उनका एक बेटा रहा करता था । पति का ना...

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औपचारिकता भरे रिश्ते By Vandna Sharma

औपचारिकता भरे रिश्तेसोहन ऑफिस जाते हुए उदास लग रहा था। उसकी आँखों में वो उदासी साफ झलक रही थी जिसे वो छिपाने की कोशिश कर रहा था। उसकी धर्मपत्नी मीना एक अध्यापिका थी। पति-पत्नी का र...

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प्रेम धरो By Deepak sharma

                   वाराणसी से कोई मिलने आया? अपने अभिवादन के साथ ही उषा पिता से पूछ बैठी । बल्लियों उछल रहे अपने दिल को और संभालना...

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AVREE Kahan Gaya By Anmol Mishra

……कुछ लिखने का मन है पता नहीं क्या लिखूँ but लिखना है। — ohkkkkkk, अभी नींद आ रही है but आज रात सोना नहीं है और एक बात है कि I love myself the most butttttt मुझे नहीं पता क्यों मैं...

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दोस्ती By Vandna Sharma

बाजार की एक दुकान के शीशे में रंग-बिरंगे फ्रेंडशिप बैंड चमक रहे थे। सीमा ठिठक गई। उसने दो सुंदर ब्रेसलेट खरीदे और बैग में रख लिए। घर जाने का मन नहीं था तो पास के पार्क में एक खाली...

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कर्मपथ – आत्मा की पुकार By Skp divine

कर्मपथ – आत्मा की पुकारभाग–1 : एक नई सुबहसूरज की पहली किरणें गाँव के खेतों पर बिखर रही थीं। हवा में मिट्टी की सोंधी खुशबू थी और मंदिर की घंटियों की ध्वनि वातावरण को पवित्र बना रही...

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जैसी करनी वैसी भरनी By Devendra Kumar

जैसी करनी वैसी भरनी सुन कर बड़ा दुःख हुआ था कि  मेरा एक पुराना सहयोगी राकेश  सोलंकी  दिल्ली के मैक्स  हॉस्पिटल के आई सी यू में काफी सीरियस हालत में भर्ती कराया गया है . एक दूसरा  पु...

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भूख By Rinki Singh

दिसंबर के अंतिम सप्ताह की वह रात हड्डियाँ जमा देने वाली थी। ठंड ऐसी कि लगता था नसों में दौड़ता हुआ खून भी कहीं रुक-रुक कर चल रहा हो। चारों ओर कोहरा इस तरह पसरा था, मानो धरती ने सफ़...

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होनी थी हो गई By Vandna Sharma

होनी थी हो गईसुबह से बारिश हो रही है। बिजली कड़क रही है।  रीना सुबह अपने बेटे को स्कूल भेज बालकनी में बैठी बारिश को देख रही है। उसने बालकनी में सुंदर सदाबहार, अपराजिता, गेंदा और तु...

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चिता की आग By Dr Sandip Awasthi

  ——————-          आंटी को पिछली बार अंकल के चौथे पे देखा था ।जाने के समय जब मैंने हाथ जोड़कर उनसे विदा ली तो कहने...

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ठुकराईन नयना देवी - 3 By Vandna Sharma

उम्र के तीसरे पड़ाव पर आकर नयनादेवी बिल्कुल शांत हो गई थीं। तीनों बच्चों की शादी के बाद घर खाली-खाली सा हो गया था। दोनों लड़के विदेश जाकर बस गए थे, और बेटी अपनी ससुराल चली गई थी। ब...

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कर्म फल By Vandna Sharma

कर्म फलआसमान में रूई जैसे बादल जगह-जगह बिखरे हुए थे। सूरज ढलने को था। पेड़ का पत्ता भी नहीं हिल रहा था। जुलाई महीने की उमस भरी शाम थी। सरोज अपनी बालकनी में बैठी ढलते हुए सूरज को दे...

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किले का आखिरी पहरेदार By Zero

️ किले का आखिरी पहरेदारसाल 1672...अरावली की पहाड़ियों के बीच बना देवगढ़ का किला उस रात बिल्कुल शांत था। आसमान में काले बादल छाए हुए थे और तेज हवा के कारण किले की दीवारों पर जल रही...

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पीपल के पत्ते By Jeetendra

बारिश  की वह पहली बूँद जब पीपल के पत्ते पर गिरी तो वरुण मिश्रा ठीक उसी पल गाँव की सीमा पर खड़ा था। उसके कंधे पर एक भारी बैग था जिसमें तीन कैमरे पाँच लेंस और एक ज़िंदगी भर की थकान ब...

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मेहमान By Vandna Sharma

मेहमानस्टेशन पर काफी भीड़ थी। सुबह साढ़े 9 बजे भी दिल्ली दौड़ रही थी। यात्री अपनी ट्रेन पकड़ने के लिए भागे जा रहे थे। रिया का टिकट बुक था लेकिन दिल्ली का प्लेटफार्म ही इतना बड़ा है...

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कलयुग का सच By Vandna Sharma

*कलयुग का सच* जुलाई की सुबह थी। रीना ने बच्चों को स्कूल भेजा, किचन समेटा और फिर अपनी माँ को फोन लगाया। फोन उठते ही माँ की आवाज सुनकर रीना चौंक गई। माँ बहुत दुखी और भारी स्वर में बो...

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लोकतंत्र की ज़मीनी सच्चाई - 2 By Std Maurya

शीर्षक ​- *देश के सच्चे नायक और हमारी खामोशी*​क्या आप जानते हैं, सोनम वांगचुक जी ने इस देश को क्या दिया है? और वे आज क्यों भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं?अगर नहीं, तो क्यों नहीं? क्या...

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जमीन का बंटवारा By Vandna Sharma

लघु कथा जमीनएक जमीन से न जाने कितने रिश्ते जुड़े होते हैं, और न जाने कितने स्वार्थ भी। सुरेश के पिताजी पिछले आठ महीनों से बीमार थे। अब वो छोटे बेटे के साथ देहरादून में रहते थे। सुर...

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